A2Z सभी खबर सभी जिले की

सिविल सर्जन की अध्यक्षता मे मातृ मृत्यु पर की गई समीक्षा बैठक l

प्रेस रिलीज: 11 मई 2026
सिविल सर्जन कक्ष
​जेपीएन अस्पताल परिसर, गया जी
…………………………………………………..

सिविल सर्जन की अध्यक्षता में मातृ मृत्यु पर की गयी समीक्षा बैठक

13 प्रखंडों में मातृ मृत्यु के 24 मामलों की जांच रिपोर्ट पर समीक्षा

अप्रैल 2025 से मई 2026 तक 67 प्रसूताओं की हुई मौत, गंभीर एनीमिया बड़ी वजह

गया, 11 मई: उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था मातृ मृत्यु का एक मुख्य कारण है। गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच नहीं कराना और प्रसव पूर्व जांच में जोखिम की स्थिति के संकेत मिलने पर लापरवाही का परिणाम मां के जीवन पर पड़ता है। जिला में मातृ मृत्यु दर की स्थिति को लेकर सोमवार को सिविल सर्जन कक्ष में सिविल सर्जन डॉ राजाराम प्रसाद की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक की गयी। समीक्षा बैठक में डीपीएम नीलेश कुमार, एनसीडीओ डॉ एमई हक, जेपीएन अस्पताल उपाधीक्षक डॉ चंद्रशेखर, यूनिसेफ से संजय कुमार, मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल से महिला चिकित्सक व अन्य मौजूद रहे। सिविल सर्जन ने 13 प्रखंडों में हुई मातृ मृत्यु के 24 मामलों की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद निर्देश दिया कि सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि रेफरल सिस्टम को मजबूत करें। अपने स्तर से मातृ मृत्यु के कारणों के सटीक जांच पड़ताल करें। सुधारात्मक उपायों के साथ जरूरी कार्रवाई करें। कहा कि अधिकतर मातृ मृत्यु गंभीर रक्तस्राव, प्रीक्लेम्पसिया, संक्रमण, असुरक्षित गर्भपात और प्रसव जटिलताओं जैसी रोकथाम योग्य समस्याओं से होती हैं। सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए अधिक खतरे वाली गर्भस्थाओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण देखभाल मातृ मृत्यु दर में बड़े पैमाने पर कमी ला सकती है।

सोशल आॅ​डिट में गंभीर एनीमिया मुख्य कारण:
डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया कि मातृ मृत्यु के सोशल आॅडिट में गंभीर एनीमिया के मामले दिखे हैं। गंभीर एनीमिया से अत्यधिक रक्तस्राव और एक्लेंपसिया जैसी अवस्था के कारण मृत्यु हुई है। बताया कि अप्रैल 2025 से मई 2026 के मध्य 67 मातृ मृत्यु के मामले दर्ज किये गये हैं। इनमें 13 मृत्यु घर पर तथा 52 मृत्यु विभिन्न अस्पतालों में हुए हैं। बताया कि कई गर्भवती ने किसी प्रकार का प्रसव पूर्व जांच नहीं कराया जिसकी वहज से जोखिम वाली गर्भावस्था की स्थिति बन गयी।

मृत्यु दर में कमी लाने गुणवत्तापूर्ण एएनसी महत्वपूर्ण:
डॉ एमई हक ने बताया कि जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने पर प्रसव पूर्व जांच में कमी दिखी है। गर्भावस्था के दौरान चार गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच बेहद जरूरी है। इससे जोखिम वाली स्थिति की पहचान कर तुरंत उपचार प्रारंभ करने में मदद मिलती है। माह के 9, 15 व 21 तारीख को आयाजित होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान पर चिकित्सक बेहतर तरीके से गर्भवती की जांच करें। इससे हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान करने में मदद मिलेगी साथ ही आवश्यक दवाओं के साथ गर्भवती का नियमित फॉलो—अप बेहद जरूरी है। मातृ मृत्यु के कारणों की प्रखंड स्तर से समीक्षा करने तथा चिकित्सकों वर्बल आॅटोप्सी करें।

त्रिलोकी नाथ डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर गयाजी बिहार

वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़

Back to top button
error: Content is protected !!